Hair Nail Vashikaran Yantra

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Baglamukhi Mantra for Enemies Most Powerful Maa Baglamukhi Devi Mantra Chanting 108 Times

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Frequently Asked Questions About Bagalamukhi Maran Mantra

When to Start This Maran Mantra Process?

    • Start This Maran Mantra Process on Wednesday At MID NIGHT Around 1 AM to 3 Am

Best Time For This Maran Mantra Process?

    • Start This Maran Mantra Process Mid Night 1 Am to 3 Am

Can I Do this Maran Mantra Process in My Menstrual Period Time ?

    • No, Avoid Using This Maran Mantra Process In Those Days

Do i have to Recite his/her name after every chant

    • No , Do that when this process Complete

How to Do Siddhi of This Maran Mantra? Complete Process ?

  • Start This Maran Mantra Process On Shulka Paksha or Krishna Paksha When There is Purnima (Full Moon ) Or Amavasaya you can start this process. Maran Mantra is not a Hoax it can do miracles overnight so we are afraid to provide whole ritual here in public Domain you can contact guruji by below comment Box Thanks you …

 

Deepwali 2018 date and pooja vidhi

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२०१८ दीवाली कैलेण्डर, दीपावली कैलेण्डर

deepawali-pooja

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दीवाली जिसे दीपावली के नाम से भी जाना जाता है, साल का सबसे प्रसिद्ध त्योहार है। दीवाली उत्सव धनतेरस से शुरू होता है और भैया दूज पर समाप्त होता है। अधिकतर प्रान्तों में दीवाली की अवधि पाँच दिनों की होती है जबकि महाराष्ट्र में दीवाली उत्सव एक दिन पहले गोवत्स द्वादशी के दिन शुरू हो जाता है।

इन पाँच दिनों के दीवाली उत्सव में विभिन्न अनुष्ठानों का पालन किया जाता है और देवी लक्ष्मी के साथ-साथ कई अन्य देवी देवताओं की पूजा की जाती है। हालाँकि दीवाली पूजा के दौरान देवी लक्ष्मीसबसे महत्वपूर्ण देवी होती हैं। पाँच दिनों के दीवाली उत्सव में अमावस्या का दिन सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है और इसे लक्ष्मी पूजालक्ष्मी-गणेश पूजा और दीवाली पूजा के नाम से जाना जाता है।

दीवाली पूजा केवल परिवारों में ही नहीं, बल्कि कार्यालयों में भी की जाती है। पारम्परिक हिन्दु व्यवसायियों के लिए दीवाली पूजा का दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दिन स्याही की बोतल, कलम और नये बही-खातों की पूजा की जाती है। दावात और लेखनी पर देवी महाकाली की पूजा कर दावात और लेखनी को पवित्र किया जाता है और नये बही-खातों पर देवी सरस्वती की पूजा कर बही-खातों को भी पवित्र किया जाता है।

दीवाली के दिन लक्ष्मी पूजा करने के लिए सबसे शुभ समय सूर्यास्त के बाद का होता है। सूर्यास्त के बाद के समय को प्रदोष कहा जाता है। प्रदोष के समय व्याप्त अमावस्या तिथि दीवाली पूजा के लिए विशेष महत्वपूर्ण होती है। अतः दीवाली पूजा का दिन अमावस्या और प्रदोष के इस योग पर ही निर्धारित किया जाता है। इसलिए प्रदोष काल का मुहूर्त लक्ष्मी पूजा के लिए सर्वश्रेस्ठ होता है और यदि यह मुहूर्त एक घटी के लिए भी उपलब्ध हो तो भी इसे पूजा के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए।